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विश्व वन

विश्व वन: यह एक वैश्विक वन है और प्राकृतिक सौंदर्य प्रदान करता है। विश्व वन की अवधारणा भारत के माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने दी थी। केवल 46 महीनों में स्टैच्यू ऑफ यूनिटी के निर्माण का मार्गदर्शन करने के बाद, उन्होंने विविधता में एकता की थीम पर एकता नगर के एकीकृत विकास की कल्पना की थी।

विश्व वन (एक वैश्विक वन) सभी 7 महाद्वीपों की मौलिक जड़ी-बूटियों, झाड़ियों और पेड़ों का घर है। वैश्विक संदर्भ में यह ‘जैव विविधता में एकता’ के अंतर्निहित विषय को भी दर्शाता है। विश्व वन इस ग्रह के सभी जीव रूपों के संदर्भ में वन्य जीवन को बनाए रखने का प्रतीक है। विश्व वन में विश्व के हर महाद्वीप का प्रतिनिधित्व करने वाली वनस्पतियों का विविध संयोजन है। वनस्पतियों को इस प्रकार से सजाया गया है कि वे एक विशेष क्षेत्र के प्राकृतिक जंगल का प्रतिरूप प्रतीत होते हैं।

इसका उद्देश्य आगंतुकों को जैव भूगोल के बारे में बताना है- भौगोलिक क्षेत्र में प्रजातियों और पारिस्थितिकी प्रणालियों के विस्तार का अध्ययन। वनस्पति विविधता में अंतर या समानता को निश्चित रूप से महाद्वीपीय घटनाओं का गुण-धर्म माना जा सकता है, और इसी का प्रयास यहाँ किया गया है।

योजना एवं क्रियान्वयन: विश्व वन स्टेच्यू ऑफ़ यूनिटी के पास 5 एकड़ क्षेत्र में फैला है। महाद्वीपों का प्रतिनिधित्व करने वाले ब्लॉकों की लहरदार सीमाओं को इस प्रकार आकार दिया गया है कि वे महाद्वीपों के नक्शे की रूपरेखा को प्रदर्शित करती हैं। उन्हें प्रत्येक महाद्वीप के लिए निर्धारित ओलंपिक रिंग के विशिष्ट रंगों के समान चित्रित किया गया है। अवधारणा को स्पष्ट करने के लिए स्व-व्याख्यात्मक संकेत तथा वनस्पतियों से जुड़ी जानकारियों को उपयुक्त स्थान दिया गया है।

विदेशियों का बसेरा– दुनिया के दूरस्थ कोनों के निवासियों के पारंपरिक आवास को दर्शाने वाली संरचनाओं का निर्माण किया गया है ताकि आगंतुकों को उनके जीवन जीने के ढंग से परिचित कराया जा सके।

परिसर में कुछ भवन हैं- 

-फिजी हाउस- ब्यूर: ब्यूर एक फिजी शब्द है जिसे लकड़ी और भूसे की झोपड़ी के लिए प्रयोग किया जाता है। परंपरागत रूप से, संजातीय फिजी दो प्रकार के घरों में रहते हैं; वेल परिवार का घर होता था, जबकि पुरुषों के घरों (जहां कबीले के खतना किए गए पुरुष मिलते थे, खाते थे, और सोते थे) को ब्यूर कहा जाता था।

-बाली हाउस: बालियों के पारंपरिक घर कड़े प्राचीन वास्तु निर्देशों का पालन करते हैं, जो कि मुख्य रूप से हिंदू और बौद्ध मान्यताओं का मिश्रण होते हैं और उनमें ऑस्ट्रोनेशियन जीवात्मवाद का पुट समाया रहता है। इसके परिणामस्वरूप एक ऐसे घर की उत्पत्ति होती है जो बालियों के हिंदुत्व के विश्व कानून के साथ “सद्भाव” में होता है।

-अफ्रीकन-लुइसियाना सम्मेलन क्षेत्र: इस सोच की खूबसूरती अफ्रीका के  पारंपरिक घरों के समूह के साथ लुइसियाना के रूढ़िवादी डिजाइनों वाले घरों में निहित है। यह दोनों महाद्वीपों के सौंदर्य वास्तुकला का मिश्रण है।

-मालोका हाउस: यह संरचना ब्राजील की देसी मारुबो जनजाति के पारंपरिक घर से प्रेरित है। एक मलोका लंबा पैतृक घर होता है जिसका उपयोग अमेज़न के देसी लोगों द्वारा किया जाता है, विशेष रूप से कोलंबिया और ब्राजील में।

-पैगोडा: पैगोडा बहुत सारे छज्जों वाली एक बहुमंजिली मीनार होती है, जो ऐतिहासिक दक्षिण एशिया में स्तूप के रूप में उत्पन्न हुईं और आगे चलकर उन्हीं परंपराओं में पूर्वी एशिया में भी विकसित हुईं।

यहाँ की यादों को अपने साथ ले जाने के लिए एक स्मारिका दुकान स्थापित की गई है। ये दुकानें आदिवासी स्वयं-सहायता समूहों द्वारा चलाई जाती हैं, जो उनकी आजीविका में योगदान करती हैं।

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